दहेज प्रथा

दहेज प्रथा जो कि हमारे समाज के लिए एक अभिशाप है,

सबसे पहले हम इस बात को जानेंगे कि दहेज प्रथा कहां से जन्मी है। 

नमस्कार आज मैं दहेज प्रथा को लेकर मेरे विचार साझा करना चाहता हूं, आशा है आप को यह पसंद आयेंगे।

     प्राचीन काल में विवाह के दौरान वधु के माता -पिता कन्या को अपनी खुशी से कुछ आवश्यक वस्तुएं, वस्त्र,धन आदि देते थे जिसे दहेज कहते हैं ,यहीं से दहेज प्रथा ने जन्म लिया। 
   लम्बे समय से इस प्रथा का अनुसरण करने के कारण और समाज के कुछ लालची लोगों के कारण दहेज प्रथा वर्तमान में एक अभिशाप के रूप में उभर आई है।
इसके लिए कहीं न कहीं वधु पक्ष भी जिम्मेदार है क्योंकि वह वर पक्ष की तुलना में अपने आप को नीचा समझते हैं और उनकी मांगो को पूरा करते गए।
   आज के दौर में लोग  विवाह के पहले यह देखते हैं कि वधु पक्ष दहेज कितना दे सकता है।
दहेज प्रथा वर्तमान समाज को खोखला कर रही है  दहेज लेना वो देना गैर कानूनी है परंतु अभी भी लोग इस प्रथा का अनुसरण कर रहे हैं।
    कई हस्ते खेलते परिवारो में दहेज को लेकर रोज क्लेश चल रहा है, कोई तलाक दे रहा है और कोई विवाह रद्द कर देता है।
   समाज में शांति और सामंजस्य स्थापित करने के लिए दहेज प्रथा को खत्म करना होगा।

हम सभी को जागरूक होकर इस बुराई को खत्म करना होगा तभी एक समृद्ध एवं गौरवशाली समाज का निर्माण होगा।
धन्यवाद !



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